तुगलकी फरमान से शिक्षक हैरान

नियमानुसार राज्य पात्रता परीक्षा के साथ डीएड और बीएड उत्तीर्ण शिक्षकों की नौकरी पर भी लटकी तलवार

दो वर्ष में टीईटी पास करना अनिवार्य, शिक्षा विभाग के आदेश से शिक्षकों में हड़कंप

एशियन रिपोर्टर ब्यूरो चीफ माधो सिंह दांगी

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश ने प्रदेश भर के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों में चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। विभाग के आयुक्त द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कार्यरत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।

दो साल में पास न होने पर सेवा से मुक्त करने का प्रावधान

सूत्रों के अनुसार यह परीक्षा जुलाई और अगस्त माह में आयोजित होने की संभावना है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई शिक्षक निर्धारित दो वर्षों की अवधि में टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता है तो उसे सेवा से मुक्त किया जा सकता है। इस निर्णय से उन शिक्षकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई है जिनकी सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष या उससे कम समय शेष है।

दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पहले से ही राज्य पात्रता परीक्षा के साथ डीएड और बीएड उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही शिक्षकों की नियुक्ति संभव होती है। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित होती रही है, इसलिए वर्तमान आदेश पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

शिक्षक संगठनों ने आदेश में संशोधन की मांग उठाई

मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग को समस्त जानकारी एकत्र कर शिक्षक हित में उचित निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाली नई नियुक्तियों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य की जा सकती है, लेकिन पहले से कार्यरत शिक्षकों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।

इस संबंध में मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस के अशोक प्रताप सिंह, अनीता सारस्वत, हरीश नामदेव, धर्मेंद्र सिंह, आरपी सिंह, महेंद्र दीक्षित, सुनील मिश्रा, कौशल शर्मा, राम रतन सिंह, सुरेश रावत, तुलसी रावत, सलमा शाह, नरेंद्र सिंह तोमर, बलवीर सिंह, निर्भय सिंह, मोहन चंद्र गौतम, विजय सिंह, राधेश्याम, संजय मछीवाल, अरुण सिंह कुशवाहा, अखिलेश, हेमराज राणा, कैलाश उइके, राकेश बलिया, नरेंद्र मिश्रा, नलिनी शाक्य, सुषमा पुरोहित, साधना सिंह, दौलत पवार, कमलेश सिंह, प्रमोद गौतम, सरिता पांडे, रुखसाना सिद्दीकी, मनोज मेहर, विमलेश, संतोष सिंह राजपूत सहित अन्य पदाधिकारियों ने शासन से मांग की है कि संशोधित आदेश जारी कर टीईटी की अनिवार्यता केवल भविष्य में होने वाली नियुक्तियों के लिए ही लागू की जाए।

 

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