क्या कहता है सनातन
अखिल विश्व सख्त सनातन संघ के अध्यक्ष उदित
भदोरिया ने सनातन में माता-पिता को भगवान मानने पर वक्तव्य में कहा कि भारतीय
संस्कृति तथा शास्त्रों में माता-पिता को भगवान का साक्षात रूप इसलिए माना जाता है
क्योंकि वह निस्वार्थ प्रेम, त्याग तथा पालन पोषण के माध्यम से बच्चों के जीवन का आधार बनते हैं, माता 9 महीने कष्ट सहकर बच्चों को जन्म
देती है, पिता
संघर्ष करके सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे वह “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, के प्रतीक बन जाते हैं,
ईश्वरत्व के मुख्य कारण
1.
माता-पिता बच्चों की खुशियों के लिए अपने सुखों का त्याग करते हैं जो
ईश्वरीय प्रेम के समान निस्वार्थ होता है
2.
प्रथम गुरु तथा संस्कार देने वाले माता-पिता होते हैं जो चलना बोलना
अच्छे बुरे का भेद सिखाते हैं
3.
माता-पिता निर्माता तथा रक्षक होते हैं जो जीवन के हर पड़ाव पर
मार्गदर्शन देते हैं
4.
जैसे भगवान भक्तों का ध्यान रखते हैं वैसे ही माता-पिता अपने बच्चों
का ध्यान तथा पोषण करते हैं
5.
माता-पिता को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता है, इसीलिए उनकी पूजा
भगवान की पूजा के समान है
किसने और क्यों माना भगवान ?
यह वचन उसने कहे जो अपने बेतुके विचार थोप कर बच्चों से सेवा करवाना
चाहते हैं, यह जबरदस्ती
दिमाग की उपज है यदि मां-बाप भगवान होते तो वह कभी मरना नहीं चाहिये, बूढ़े भी नहीं होना चाहिए, बीमार भी नहीं होना चाहिए, माता-पिता तो हर जन्म में हर योनि में
मिलते हैं, भगवान
तो अपने में मिला लेते हैं हमेशा के लिए ताकि आवागमन समाप्त हो जावे, यदि माता-पिता भगवान है तो आप क्यों
भटक रहे हो, पृथ्वी पर सभी आत्माएं अस्थाई जीव है, इसलिए हमने भगवान मान लिया है जब
जर्रेजर्रे में भगवन है तो सिर्फ मूर्ति में ही क्यों, मनुष्य की बनाई हुई तस्वीरों में क्यों, सब पाखंड है, मूर्ति का मतलब जीवित शरीर अर्थात आपकी
मूर्ति देह, जिसमें
जीव रहता है, तथा
जीव के घर में भगवान रहते हैं, इसलिए जीव अजर अमर अविनाशी है (आत्मा) यदि स्वयं के अंदर भगवान को
जान लिया तो आवागमन रुक जाएगा, मानव के माता-पिता के रूप में निष्ठा बनी रहे तथा प्रेम रहे इसलिए
पूर्वजों ने उन्हें भगवान कहा, अपने आप सोचो यदि रामायण काल में रावण के बेटे आज्ञाकारी थे पर वह
राक्षस था, सभी
बेटे उसकी आज्ञा का पालन करते थे परंतु वह पिता भगवान नहीं था, राक्षस था इसलिए सभी माता-पिता भगवान
नहीं हो सकते, महाभारत
काल में कौरवों के पिता धृतराष्ट्र को भी भगवान नहीं कह सकते, इसी प्रकार हिरण्यकश्यप के पुत्र
प्रहलाद ने भी अपने पिता को भगवान नहीं माना |



0 Comments